Registration Marquee
🌾🚜 सौभाग्यवती एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड 🇮🇳 | किसानों के लिए सरकारी योजनाएं, खेती की नई तकनीक, पशुपालन विकास, कृषि सब्सिडी, बीज-खाद जानकारी और डिजिटल कृषि समाधान | 👉 Registration के लिए यहाँ क्लिक करें – खुशहाल किसान, समृद्ध भारत 🌾🚜

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है,ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है?

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है? | पूरी गाइड 2026

ड्रैगन फ्रूट (जिसे हिंदी में कमलम या पिताया भी कहते हैं) आजकल भारत में सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रहा विदेशी फल है। यह न सिर्फ सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि इसकी खेती से किसान कम पानी और कम मेहनत में लंबे समय तक लाखों की कमाई कर सकते हैं। एक बार सही तरीके से पौधे लगा लें तो 20-25 साल तक नियमित फल मिलते रहते हैं।

2026 में भारत सरकार इसका क्षेत्रफल 50,000 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर आप भी ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए पूरा गाइड है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है
ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है? (Dragon Fruit Farming in Hindi)

Published by – Saubhagyawati Agro Farmer Producer Company Limited

ड्रैगन फ्रूट की खेती आज भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह एक विदेशी फल है, लेकिन अब भारत के कई राज्यों में इसकी सफल खेती की जा रही है। बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों अधिक होने के कारण किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जलवायु

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त होती है। 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए अच्छा माना जाता है। अधिक ठंड और ज्यादा पानी फसल को नुकसान पहुँचा सकता है।

उपयुक्त मिट्टी

इसकी खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7 के बीच होना चाहिए।

पौध तैयार करना और रोपण

ड्रैगन फ्रूट की खेती कटिंग द्वारा की जाती है। एक स्वस्थ पौधे की 1–1.5 फीट लंबी कटिंग को जमीन में लगाया जाता है। पौधों के सहारे के लिए सीमेंट या लकड़ी के खंभों का उपयोग किया जाता है।

सिंचाई और खाद प्रबंधन

ड्रैगन फ्रूट को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती। ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त रहती है। गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जरूरत अनुसार NPK खाद का प्रयोग करें।

फूल और फल आने का समय

रोपण के 12–18 महीनों में पौधों पर फूल आने लगते हैं। फूल रात में खिलते हैं और 30–35 दिनों में फल तैयार हो जाता है।

उत्पादन और मुनाफा

एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती से 6 से 8 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। यह खेती 20–25 साल तक उत्पादन देती है, जिससे लंबे समय तक लाभ मिलता है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है? | Dragon Fruit Farming Guide in Hindi

ड्रैगन फ्रूट की खेती आज भारत में उच्च लाभ वाली बागवानी खेती के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम पानी, कम लागत और अधिक बाजार मूल्य के कारण यह फल किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प बन चुका है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे होती है, इसकी जलवायु, मिट्टी, पौध रोपण, लागत, उत्पादन और कमाई की पूरी जानकारी।

Saubhagyawati Agro Farmer Producer Company Limited की ओर से प्रस्तुत यह लेख विशेष रूप से नए और उन्नत किसानों के लिए तैयार किया गया है।

ड्रैगन फ्रूट क्या है?

ड्रैगन फ्रूट को पिताया (Pitaya) भी कहा जाता है। यह कैक्टस प्रजाति का फल है, जिसकी बाहरी त्वचा गुलाबी और अंदर सफेद या लाल रंग की होती है। यह फल एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन और विटामिन-C से भरपूर होता है, इसलिए शहरों और निर्यात बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जलवायु

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उष्ण और उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

  • तापमान: 20°C से 35°C

  • कम वर्षा वाले क्षेत्र अधिक उपयुक्त

  • पाला और अत्यधिक ठंड नुकसानदायक

  • तेज धूप में भी फसल अच्छी होती है

भारत में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और दक्षिण भारत के कई राज्य इसके लिए उपयुक्त हैं।

मिट्टी का चयन

ड्रैगन फ्रूट की खेती लगभग हर प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन सबसे अच्छी पैदावार के लिए:

  • अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी

  • मिट्टी का pH मान: 5.5 से 7.5

  • जलभराव वाली भूमि से बचें

खेती से पहले खेत की गहरी जुताई करना आवश्यक होता है।

ड्रैगन फ्रूट की उन्नत किस्में

भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार की किस्में प्रचलित हैं:

  1. सफेद गूदा (White Flesh) – अधिक उत्पादन

  2. लाल गूदा (Red Flesh) – अधिक बाजार कीमत

  3. गुलाबी गूदा (Pink Flesh) – निर्यात के लिए उपयुक्त

लाल गूदे वाली किस्में किसानों को ज्यादा मुनाफा देती हैं।

पौध तैयार करने की विधि

ड्रैगन फ्रूट की खेती बीज से नहीं बल्कि कटिंग (कलम) से की जाती है।

  • 20–25 सेमी लंबी स्वस्थ कटिंग लें

  • रोपण से पहले 2–3 दिन छाया में सुखाएं

  • प्रमाणित नर्सरी से पौध लेना बेहतर

ड्रैगन फ्रूट का रोपण कैसे करें?

रोपण का सबसे अच्छा समय जून से अगस्त और फरवरी से मार्च माना जाता है।

रोपण विधि:

  • पौधे खंभों (सीमेंट/कंक्रीट पोल) के सहारे लगाए जाते हैं

  • एक खंभे के चारों ओर 4 पौधे

  • पौधे से पौधे की दूरी: 2.5 × 2.5 मीटर

एक एकड़ में लगभग 700–800 पौधे लगाए जा सकते हैं।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

अच्छी पैदावार के लिए संतुलित खाद आवश्यक है:

  • गोबर की सड़ी खाद: 10–15 किलो प्रति पौधा

  • NPK उर्वरक आवश्यकता अनुसार

  • जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट लाभकारी

साल में 2–3 बार खाद देना पर्याप्त होता है।

सिंचाई व्यवस्था

ड्रैगन फ्रूट को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती।

  • ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर

  • गर्मियों में 7–10 दिन में एक बार

  • बरसात में सिंचाई की जरूरत नहीं

अधिक पानी से जड़ सड़ने की संभावना होती है।

फूल और फल आने का समय

  • रोपण के 12–15 महीने बाद फूल आना शुरू

  • एक पौधा साल में 3–4 बार फल देता है

  • फल 30–35 दिन में तैयार हो जाता है

एक पौधे से औसतन 8–10 किलो फल प्राप्त होता है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती में लागत

एक एकड़ ड्रैगन फ्रूट की खेती की अनुमानित लागत:

  • पौध व खंभा: ₹2.5–3 लाख

  • सिंचाई व देखभाल: ₹50,000

  • कुल लागत: ₹3–3.5 लाख

यह लागत पहले साल ज्यादा होती है, बाद के वर्षों में कम हो जाती है।

ड्रैगन फ्रूट से कमाई कितनी होती है?

  • उत्पादन: 8–10 टन प्रति एकड़

  • बाजार भाव: ₹150–300 प्रति किलो

  • वार्षिक आय: ₹10–15 लाख प्रति एकड़

  • शुद्ध लाभ: ₹7–10 लाख तक संभव

फसल 20–25 साल तक उत्पादन देती है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के फायदे

  • कम पानी में खेती

  • रोग-कीट का खतरा कम

  • लंबी अवधि तक उत्पादन

  • निर्यात और होटल इंडस्ट्री में भारी मांग

  • उच्च लाभ वाली खेती

ड्रैगन फ्रूट क्या है और इसके फायदे

ड्रैगन फ्रूट एक तरह का क्लाइम्बिंग कैक्टस (नागफनी जैसा) पौधा है। इसका फल लाल-गुलाबी छिलके वाला, अंदर सफेद या लाल गूदा और काले छोटे-छोटे बीज वाला होता है।

स्वास्थ्य लाभ:

इम्यूनिटी बढ़ाता है

पाचन तंत्र मजबूत करता है

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

डायबिटीज और एनीमिया में फायदेमंद

वजन कंट्रोल में मददगार

उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे अच्छी रहती है।

तापमान: 20°C से 35°C (40°C तक भी सहन कर लेता है)

न्यूनतम तापमान: 10°C से नीचे नहीं जाना चाहिए

वर्षा: 50-150 सेमी (कम पानी वाली फसल है)

मिट्टी:

अच्छी जल निकासी वाली कोई भी मिट्टी (रेतीली दोमट सबसे उत्तम)

pH मान: 5.5 से 7.0

जलभराव वाली मिट्टी बिल्कुल नहीं

उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा में सफलतापूर्वक हो रही है।

प्रमुख किस्में (2026 में लोकप्रिय)

व्हाइट फ्लेश (सफेद गूदा): थाईलैंड, वियतनाम – सबसे ज्यादा उगाई जाती है

रेड फ्लेश (लाल गूदा): ज्यादा मीठी, बाजार में प्रीमियम कीमत

अमेरिकन रेड – भारत में अच्छा प्रदर्शन

भारतीय हाइब्रिड (IIHR बैंगलोर द्वारा विकसित) – ज्यादा उपज वाली

खेती की तैयारी और रोपण विधि

ड्रैगन फ्रूट को बीज से कम और कटिंग (तने की कटिंग) से ज्यादा लगाया जाता है। कटिंग से जल्दी फल आते हैं।

रोपण का सबसे अच्छा समय: फरवरी से मई (गर्मी शुरू होने से पहले)

दूरी और सिस्टम:

सिंगल पोस्ट सिस्टम (सबसे लोकप्रिय): 2×2 मीटर या 3×3 मीटर

एक एकड़ में 700-1100 पौधे लग सकते हैं

कंक्रीट/लकड़ी/बांस के खंभे (1.8-2 मीटर ऊँचे) लगाएं

हर खंभे पर 3-4 कटिंग लगाएं

रोपण विधि:

खंभे के चारों ओर 60×60×60 सेमी गड्ढा खोदें

गड्ढे में 10-15 किलो गोबर खाद + 100 ग्राम सुपर फास्फेट + मिट्टी भरें

कटिंग को 45-60 सेमी लंबी लें, नीचे से 2-3 दिन छाया में सुखाएं

गड्ढे में लगाकर सहारा दें

सिंचाई और खाद प्रबंधन

यह कम पानी वाली फसल है (कैक्टस फैमिली)

पहली 6 महीने: 7-10 दिन में हल्की सिंचाई

बाद में: 15-20 दिन में एक बार (ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी)

बरसात में पानी निकासी का विशेष ध्यान

खाद:

प्रति पौधा सालाना: 10-15 किलो गोबर/कम्पोस्ट

रासायनिक: N:P:K – 200:100:200 ग्राम/पौधा/वर्ष (3 भागों में)

जैविक खाद और नीम की खली का ज्यादा प्रयोग करें

कीट-रोग प्रबंधन

ड्रैगन फ्रूट में कीट-रोग बहुत कम लगते हैं।

मुख्य समस्या:

फंगस (एन्थ्रेक्नोज) – अच्छी जल निकासी और हवा का संचार रखें

पक्षी और चूहे – जाल से बचाव

सनबर्न – 25-30% छाया जाल लगाएं (पहले साल)

फूल आना, फल लगना और कटाई

रोपण के 12-18 महीने बाद पहला फूल

फूल रात में खिलता है (सेल्फ पोलिनेशन या हाथ से परागण)

फल पकने में 30-40 दिन

कटाई का समय: जून से नवंबर (मुख्य सीजन), कुछ किस्मों में साल भर

फल को हल्का दबाने पर नरम लगे तो तोड़ें

उपज:

2-3 साल बाद: 8-12 टन प्रति एकड़

4-5 साल बाद: 15-20 टन तक संभव

लागत और मुनाफा (2026 अनुमानित)

एक एकड़ में औसत खर्च (पहले साल):

पौधे + खंभे + सिंचाई: ₹1.2-1.8 लाख

कुल पहला साल: ₹2-2.5 लाख

आय:

3rd साल से: 10 टन × ₹80-150/किलो = ₹8-15 लाख

शुद्ध मुनाफा: ₹5-10 लाख प्रति वर्ष (लगातार 20+ साल)

टिप: ड्रिप + मल्चिंग + जैविक खेती से लागत कम और कीमत ज्यादा मिलती है।

ड्रैगन फ्रूट क्या है और इसके फायदे

ड्रैगन फ्रूट एक तरह का क्लाइम्बिंग कैक्टस (नागफनी जैसा) पौधा है। इसका फल लाल-गुलाबी छिलके वाला, अंदर सफेद या लाल गूदा और काले छोटे-छोटे बीज वाला होता है।

स्वास्थ्य लाभ:

इम्यूनिटी बढ़ाता है

पाचन तंत्र मजबूत करता है

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

डायबिटीज और एनीमिया में फायदेमंद

वजन कंट्रोल में मददगार

उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे अच्छी रहती है।

तापमान: 20°C से 35°C (40°C तक भी सहन कर लेता है)

न्यूनतम तापमान: 10°C से नीचे नहीं जाना चाहिए

वर्षा: 50-150 सेमी (कम पानी वाली फसल है)

मिट्टी:

अच्छी जल निकासी वाली कोई भी मिट्टी (रेतीली दोमट सबसे उत्तम)

pH मान: 5.5 से 7.0

जलभराव वाली मिट्टी बिल्कुल नहीं

उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा में सफलतापूर्वक हो रही है।

प्रमुख किस्में (2026 में लोकप्रिय)

व्हाइट फ्लेश (सफेद गूदा): थाईलैंड, वियतनाम – सबसे ज्यादा उगाई जाती है

रेड फ्लेश (लाल गूदा): ज्यादा मीठी, बाजार में प्रीमियम कीमत

अमेरिकन रेड – भारत में अच्छा प्रदर्शन

भारतीय हाइब्रिड (IIHR बैंगलोर द्वारा विकसित) – ज्यादा उपज वाली

खेती की तैयारी और रोपण विधि

ड्रैगन फ्रूट को बीज से कम और कटिंग (तने की कटिंग) से ज्यादा लगाया जाता है। कटिंग से जल्दी फल आते हैं।

रोपण का सबसे अच्छा समय: फरवरी से मई (गर्मी शुरू होने से पहले)

दूरी और सिस्टम:

सिंगल पोस्ट सिस्टम (सबसे लोकप्रिय): 2×2 मीटर या 3×3 मीटर

एक एकड़ में 700-1100 पौधे लग सकते हैं

कंक्रीट/लकड़ी/बांस के खंभे (1.8-2 मीटर ऊँचे) लगाएं

हर खंभे पर 3-4 कटिंग लगाएं

रोपण विधि:

खंभे के चारों ओर 60×60×60 सेमी गड्ढा खोदें

गड्ढे में 10-15 किलो गोबर खाद + 100 ग्राम सुपर फास्फेट + मिट्टी भरें

कटिंग को 45-60 सेमी लंबी लें, नीचे से 2-3 दिन छाया में सुखाएं

गड्ढे में लगाकर सहारा दें

सिंचाई और खाद प्रबंधन

यह कम पानी वाली फसल है (कैक्टस फैमिली)।

पहली 6 महीने: 7-10 दिन में हल्की सिंचाई

बाद में: 15-20 दिन में एक बार (ड्रिप सिंचाई सबसे अच्छी)

बरसात में पानी निकासी का विशेष ध्यान

खाद:

प्रति पौधा सालाना: 10-15 किलो गोबर/कम्पोस्ट

रासायनिक: N:P:K – 200:100:200 ग्राम/पौधा/वर्ष (3 भागों में)

जैविक खाद और नीम की खली का ज्यादा प्रयोग करें

कीट-रोग प्रबंधन

ड्रैगन फ्रूट में कीट-रोग बहुत कम लगते हैं।

मुख्य समस्या:

फंगस (एन्थ्रेक्नोज) – अच्छी जल निकासी और हवा का संचार रखें

पक्षी और चूहे – जाल से बचाव

सनबर्न – 25-30% छाया जाल लगाएं (पहले साल

फूल आना, फल लगना और कटाई

रोपण के 12-18 महीने बाद पहला फूल

फूल रात में खिलता है (सेल्फ पोलिनेशन या हाथ से परागण)

फल पकने में 30-40 दिन

कटाई का समय: जून से नवंबर (मुख्य सीजन), कुछ किस्मों में साल भर

फल को हल्का दबाने पर नरम लगे तो तोड़ें

उपज:

2-3 साल बाद: 8-12 टन प्रति एकड़

4-5 साल बाद: 15-20 टन तक संभव

लागत और मुनाफा (2026 अनुमानित)

एक एकड़ में औसत खर्च (पहले साल):

पौधे + खंभे + सिंचाई: ₹1.2-1.8 लाख

कुल पहला साल: ₹2-2.5 लाख

आय:

3rd साल से: 10 टन × ₹80-150/किलो = ₹8-15 लाख

शुद्ध मुनाफा: ₹5-10 लाख प्रति वर्ष (लगातार 20+ साल)

टिप: ड्रिप + मल्चिंग + जैविक खेती से लागत कम और कीमत ज्यादा मिलती है।

निष्कर्ष


ड्रैगन फ्रूट की खेती एक स्मार्ट फार्मिंग विकल्प है। कम पानी, कम मेहनत, लंबी अवधि की कमाई और बढ़ती मांग – यह सब इसे आकर्षक बनाता है। अगर आपके पास 0.5-1 एकड़ जमीन भी है तो शुरू करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top